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वह घर

वह घर याद आता है, जहॉं मैं पली-बढ़ी।
वह जगह याद आती है जहॉं मैं बैठे-बैठे सोई।
वह रातें याद आती है जिनसे मेरी खूब जमी।
आल्विदा कहते हुए उस घर को ऑंखों पर छा गई एक अजब सी नमी।

- अवंती सचिन मुजुमले

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3 Comments

Swati chourasia

11-Nov-2021 06:56 PM

Nice

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Seema Priyadarshini sahay

09-Nov-2021 05:27 PM

सुंदर पंक्तियां

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🤫

03-Nov-2021 02:14 PM

👌👌

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